‘मेहंदी’ के एक्टर को क्या हुआ था: फराज खान सुपुर्द-ए-खाक कर काम पर लौटे उनके भाई फाहमान, बोले- उन्हें रेयर बीमारी थी

By | 6th November 2020


एक घंटा पहले

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फाहमान और फराज खान। 3 नवंबर को बेंगलुरु के एक हॉस्पिटल में फराज खान का इंतकाल हो गया था। फोटो साभार- स्पॉटबॉय।

‘मेहंदी’ और ‘फरेब’ जैसी फिल्मों के एक्टर फराज खान को सुपुर्द-ए-खाक करने के एक दिन बाद ही उनके भाई फाहमान शूटिंग कमिटमेंट के चलते मुंबई लौटना पड़ा। वे हाल ही में लॉन्च हुए शो ‘अपना टाइम आएगा’ में डॉ. वीर प्रताप सिंह राजावत का किरदार निभा रहे हैं। गुरुवार को फाहमान मुंबई लौटे और उसी दिन शूटिंग भी शुरू कर दी। एक एंटरटेनमेंट वेबसाइट से बातचीत में फाहमान ने फराज की बीमारी पर बात की। साथ ही बताया कि उनकी मौत से पूरा परिवार बुरी तरह डिस्टर्ब है।

उनकी बीमारी रेयर थी : फाहमान

स्पॉटबॉय से बातचीत में फाहमान ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो उनकी बीमारी रेयर थी। डॉक्टर्स ने हर संभव कोशिश की। अगर दूसरे वायरस के साथ बाइफरकेट करें तो यह बहुत डेडली वायरस नहीं था। डॉक्टर ने हमें बताया कि उनकी बॉडी में जो बैक्टीरिया था, उसने ऐसे बैक्टीरिया डेवलप किए, जो एंटीबायोटिक देते वक्त बैठ जाते थे।”

इम्युनिटी हो गई थी बेहद लो

बकौल फाहमान, “इंसान के शरीर में इम्युनिटी कम से कम करीब 700 होनी चाहिए, लेकिन उनकी इम्युनिटी 23.9 तक गिर गई थी। इसलिए उनकी बॉडी पर कोई एंटीबायोटिक काम नहीं कर रही थी। और यह पिछले कुछ समय से चल रहा था। मुझे एग्जेक्ट मेडिकल टर्म याद नहीं, लेकिन उनके दिमाग में कोई वायरस आ गया था, जिसके चलते उन्हें कई तरह की परेशानी हुई और फिर उनके शरीर ने जवाब दे दिया।”

करीब डेढ़ साल से बीमार थे फराज

फाहमान की मानें तो फराज करीब डेढ़ साल से बीमार थे। वे कहते हैं, “वे करीब दढ़ साल से हेल्थ संबंधी परेशानी से जूझ रहे थे। शुरुआत में उन्होंने टीबी हुआ था। तभी से उनका इलाज चल रहा था। इसी दौरान उनके शरीर में अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया का कॉम्बिनेशन हो गया।”

शूट से लौटे ही भाई की मौत की खबर मिली

फाहमान बताते हैं, “मैं अपने परिवार के लगातार संपर्क में था। जिस दिन सुबह मुझे बताया गया कि उनकी हालत बेहद खराब है, उसी रात करीब 9:40 बजे परिवार ने मुझे उनके इंतकाल की सूचना दी। जिस वक्त उन्होंने अंतिम सांस ली, तब मेरा एक और भाई, उनकी पत्नी और मेरे कजिन हॉस्पिटल में ही थे। जब मुझे यह दुखद खबर मिली, तब मैं शूट से घर पहुंचा ही था। अगली सुबह मैं उनके जनाजे में शामिल होने बेंगलुरु पहुंच गया।”



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